सुनो तूफान से आती हुई आवाज़ कहती है
किनारों तुम से हम अच्छे हैं तुम तो टूट जाते हो
नहीं आते हो मिलने दोस्तो,तुम को समझता हूँ
बहुत सी रस्म हैं दुनिया की जिन से छूट जाते हो
मेरी पलकों पे दिये और जलते क्यूँ हो ?
मैं जो गम भूल गया याद दिलाते क्यूँ हो ?
भूल जाना जिसे चाहा है हमेशा मैने ।
फिर वो ही बात मुझे याद दिलाते क्यूँ हो ?
बेज़ार देहलवी
आपकी ग़जल आपकी नज़म बेजार कर गई! वाकई बहुत सुंदर हैं।
जवाब देंहटाएंराजेंद्र त्यागी