मंगलवार, 28 सितंबर 2010

यादें

सुनो तूफान से आती हुई आवाज़ कहती है
किनारों तुम से हम अच्छे हैं तुम तो टूट जाते हो
नहीं आते हो मिलने दोस्तो,तुम को समझता हूँ
बहुत सी रस्म हैं दुनिया की जिन से छूट जाते हो

मेरी पलकों पे दिये और जलते क्यूँ हो ?
मैं जो गम भूल गया याद दिलाते क्यूँ हो ?
भूल जाना जिसे चाहा है हमेशा मैने ।
फिर वो ही बात मुझे याद दिलाते क्यूँ हो ?

बेज़ार देहलवी

1 टिप्पणी:

  1. आपकी ग़जल आपकी नज़म बेजार कर गई! वाकई बहुत सुंदर हैं।
    राजेंद्र त्‍यागी

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