वो रंग भरना सका दर्द के फ़साने मैं
वो खुद ही रोंने लगा था मुझे हँसाने मैं
न जाने कितने ख्यालों में घिर गया होगा
जो उस को देर लगी फैसला सुनाने मैं
ये इल्तजा है मेरा इम्तहान मत लेना
कि रिश्ता टूट भी जाता है अजमानें मैं
वो ही तो निकला नतीजा जिसे निकलना था
मैं खुद को भूल गया हूँ तुझे भुला ने मैं
मुझे भी सहने की ताकत खुदा ने दे दी है
तुम्हे भी आने लगा है मज़ा सताने मैं
तालुक्कात को मत दोस्ती कहो बेजार
कँहा की दोस्ती और वो भी इस ज़माने मैं
बेजार देहलवी
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