दिल हैं वीरान तो फिर दिल मैं बसायें कैसे
और अग़र भूलना चाहे तो भुलाये कैसे
मुझसे सब मेरी खामोशी का सब़ब पूछते हैं
कशमकश में हूँ तेरा नाम बतायें कैसे
एक मुद्दत से लगा रखा है मुंह को ताला
ये जो पलकों की नमी है वो छुपायएँ कैसे
याद करने से भी कुछ मिलता नहीं दिल को सुंकू
तुम्हीं बतलाओ तुम्हे भूल भी जायें कैसे
रत जगे कहकहे ख़ट्टी कभी मीठी बातें
सोचता हूँ के वो दिन लौट के आयें कैसे
मेरी खुद्दारी मेरे पांव पकड़ लेती हैं
तेरी दहलीज़ पे अब जायें तो जायें कैसे
सभी कहते हैं उसे भूल भी जाओ "बेज़ार"
ये बताता नहीं कोई के भुलायें कैसे
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